सीवान, मई 26 -- किसी ने कहा है कि गांव व शहर की सांस्कृतिक विरासत की कहानी वहां के तालाब व पोखर बयां करते हैं। तालाब व पोखर वहां की समृद्धि के द्योतक होते थे। लेकिन सामाजिक व प्रशासनिक उपेक्षा के कारण आज गांव से लेकर शहर तक पोखर व तालाब इस तरह से गायब हो रहे हैं कि वहां इसके निशान भी नहीं मिल रहे हैं। सरकारी उपेक्षा इस कदर है कि तालाब व पोखर के आंकड़े भी सही नहीं है। जिले में गैर सरकारी आंकड़ों व प्रत्येक गांव में एक -दो तालाब होने की लोगों की बातें मानें तो जिले में करीब तीन से साढ़े तीन हजार तक तालाब व पोखर होने चाहिए। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। मत्स्य विभाग के आंकड़ों को देखें तो जिले में मात्र 983 तालाब ही हैं। जिसे हम राजस्व तालाब भी कह सकते हैं। लेकिन जिन तालाबों में मछली पालन नहीं होता है। इसका आंकड़ा जिले में ...
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