सीतापुर, मई 30 -- सीतापुर। नशामुक्ति को लेकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, सख्त कानून और पुनर्वास केंद्र, ये सभी सराहनीय पहलें हैं, लेकिन क्या ये वाकई प्रभावी साबित हो रही हैं। इसे लेकर संदेह है। आज भी गली-मोहल्लों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक, नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। युवा पीढ़ी, जो देश का भविष्य है, सबसे ज्यादा इस नशे के दलदल में फंस रही है। तंबाकू, शराब, गांजा, चरस, स्मैक और अब तो सिंथेटिक ड्रग्स भी आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। हालत ये हैं कि नशे की लत ने आज अधिकांश घरों में शांति भंग कर दी है। पति-पत्नी के बीच झगड़े, बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर, आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव ये सब नशे की वजह से उत्पन्न होने वाली समस्याएं हैं। नशेड़ी व्यक्ति अपनी लत को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है, जिससे परिवार मे...