सीतापुर, जनवरी 15 -- सतयुग के तीर्थ के रूप में प्रतिष्ठित नैमिषारण्य धाम हिन्दू धर्मग्रन्थो में विशिष्ट स्थान रखता है। महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखे गए 18 पुराणों में इस तपोभूमि की महत्ता की प्रप्ति होती है। वहीं इस तीर्थ को महर्षि वेदव्यास ने अष्टम वैकुण्ठ की उपाधि से भी अलंकृत किया गया है। हिन्दू धर्म की चार धाम, गंगासागर तीर्थ, पितृ कर्म यात्रा जैसी तमाम धार्मिक यात्राएं श्रद्धालुओं के नैमिष तीर्थ आकर पूजन कर्म किये बिना पूर्ण नहीं होती हैं। यहां की 84 कोस की परिधि में स्वयं देवादिदेव के साथ 33 कोटि देव व साढ़े तीन करोड़ तीर्थो का वास माना जाता है। इसके बावजूद भी नैमिष अभी भी उन ऊचाईयों को नहीं छू सका है, जहां उसे होना चाहिए था। हालांकि इस तीर्थ स्थली को पर्यटन के मानचित्र पर उभारने को लेकर प्रदेश सरकार ने अपनी कवायदें तेज कर दी हैं। पर्यट...
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