सीतापुर, जनवरी 3 -- अपराध-अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए वर्ष 1948 में प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) की स्थापना की गई। वर्तमान में पीआरडी जवान सिविल या ट्रैफिक पुलिस के सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं, खासकर शहर के यातायात नियंत्रण में इनका खासा योगदान है। यही नहीं तमाम सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा के साथ आपदा के समय में भी प्रांतीय रक्षा दल के जवानों को तैनात किया जाता है। पीआरडी जवानों ने कहा कि इतनी महत्वपूण जिम्मेदारी निभाने के बाद भी उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जवानों ने कहा कि कम दैनिक भत्ते के अलावा वर्दी से लेकर जूते, सर्दी के कपड़े और यहां तक कि सीटी भी अपने पास से खरीदनी पड़ रही हैं। जवानों ने कहा कि उनकी संख्या अधिक है मगर ड्यूटी काफी कम होती है। ऐसे में पीआरडी जवानों को वर्ष भर काम भी नहीं मिलता है। पीआरडी जवानों न...