सीतापुर, नवम्बर 12 -- एक तरफ मोबाइल और स्क्रीन टाइम की बढ़ती लत, दूसरी तरफ प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव। युवाओं और बच्चों को इस दोहरी चुनौती से बचाने के लिए सरकार ने पुस्तकों की ओर रुख करने की जो पहल की है, वह निःसंदेह सराहनीय है। तर्क स्पष्ट है, स्क्रीन टाइम घटेगा, आंखों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव कम होंगे, और ज्ञान का दायरा बढ़ेगा। मगर, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। शहर ही जिले में लाखों छात्र-छात्राओं के लिए केवल एक ही राजकीय पुस्तकालय उपलब्ध है, जबकि जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या ही लाख से अधिक है। ऐसे में बहुत ही सीमित छात्र-छात्राएं ही इस सुविधा का लाभ उठा पा रहे हैं। हालांकि जिले के ग्रामीण इलाकों में भी सरकारी लाइब्रेरी स्थापित करने की योजना है। जिसके तहत जल्द ही ग्रामीण इलाकों में कुल 32...
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