सीतापुर, अगस्त 30 -- सांस्कृतिक गतिविधियां किसी भी समाज का आईना होती हैं। ये न केवल समाज की परंपराओं, संस्कृतियों और भावनाओं को संजोती हैं बल्कि लोगों के मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास में भी अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन जब कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच न मिले, तो धीरे-धीरे सांस्कृतिक गतिविधियां दम तोड़ने लगती हैं। सीतापुर जिले में यही स्थिति देखने को मिल रही है। कभी रंगमंच, नृत्य और गायन की परंपरा में अपनी पहचान रखने वाला सीतापुर जिला आज मंच और सुविधाओं के अभाव में सांस्कृतिक गतिविधियों से लगभग वंचित हो गया है। हालत ये है कि गग्रामीण इलाकों की बात तो छोड़िए शहर में इन विधाओं से जुड़ी प्रतिभाओं के लिए नियमित अभ्यास तक के लिए जगह नहीं है। कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए न तो कोई मंच मिल रहा है और न ही सरकार की तरफ से ...
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