भागलपुर, फरवरी 6 -- प्रस्तुति: श्रुतिकांत माछ, पान और मखान केवल तीन खाद्य पदार्थ नहीं हैं, बल्कि मिथिला की आत्मा, उसकी संस्कृति और उसकी पहचान के जीवंत प्रतीक हैं। सदियों से ये तत्व मिथिला की लोक-परंपराओं, सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक चेतना को परिभाषित करते आए हैं। पग-पग पोखर, माछ-मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान जैसी पंक्तियां आज भी लोकगीतों, मैथिली साहित्य और स्मृतियों में जीवित हैं, लेकिन बदलते समय और परिस्थितियों के बीच जमीनी सच्चाई इन पंक्तियों से लगातार दूर होती जा रही है। आज वही माछ, पान और मखान जिन्हें जिले का प्रतीक चिह्न माना गया है, आम लोगों की पहुंच से धीरे-धीरे बाहर होते जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित स्मारिकाओं, सरकारी दस्तावेजों, ध्वजों और प्रतीकों में आज भी इनकी आकृतियां अंकित हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में इनकी मौजूद...