भागलपुर, दिसम्बर 8 -- सलखुआ/ धर्मेंद्र कुमार कोसी दियारा क्षेत्र में कई वित्तरहित कॉलेज आज भी लाखों की आबादी के बीच उच्च शिक्षा का एकमात्र सहारा बने हुए हैं। इन कॉलेजों ने पिछले कई दशकों में हजारों छात्रों का भविष्य गढ़ा है, अनेक पीढ़ियों को मुख्यधारा में लाने का काम किया है। लेकिन विडंबना यह है कि इन संस्थानों को जीवित रखने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों का खुद का जीवन आज भी संकट, उपेक्षा और असुरक्षा में घिरा है। उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुच चुके कई शिक्षकों के लिए सेवानिवृत्ति सम्मान नहीं, बल्कि नई कठिनाइयों की शुरुआत है। इन कॉलेजों में पढ़ाने वाले अधिकांश शिक्षकों की आयु 60 वर्ष से ऊपर हो चुकी है, लेकिन न उनके लिए पेंशन का प्रावधान है, न कोई मासिक वेतन, न स्वास्थ्य सुविधा, न पारिवारिक सुरक्षा। उन्हें पूरे वर्ष की सेवा के बदले केवल एक बार...