भागलपुर, सितम्बर 21 -- जिले के पशुपालकों की चिंता 04 से पांच लीटर तक प्रतिदिन दूध देती है बछौर नस्ल की गाय 06 बार से अधिक देसी नस्ल की गाय दे सकती है बच्चे 05 सौ से अधिक थी क्षेत्र में देसी नस्ल की गाय जो अब घटकर दर्जनभर रह गयी है कोसी सहित सीमावर्ती इलाके की पहचान मानी जाने वाली परम्परागत बछौर प्रजाति की गाय अब धीरे-धीरे इतिहास बनती जा रही है। कभी हर घर-आंगन में दर्जनों की संख्या में दिखने वाली यह देशी नस्ल आज बिरले ही नजर आती है। बाजारू लाभ की होड़ में पशुपालक ज्यादा दूध देने वाली बाहरी नस्लों जैसे साहीवाल, गिर, हरियाणवी और लाल सिंधी को तरजीह दे रहे हैं। जबकि बछौर प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम खर्च और साधारण रखरखाव में भी यह अच्छी मात्रा में दूध देती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थानीय जलवायु और वातावरण में पली-बढ़ी इस गाय में र...
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