लखनऊ, फरवरी 15 -- कानपुर रोड स्थित अमौसी मेट्रो स्टेशन से महज एक किलोमीटर दाहिनी तरफ बदालीखेड़ा अवध विहार कॉलोनी आज विकास की मुख्यधारा से कोसो दूर, बदहाली और असुरक्षा का पर्याय बन गई है। करीब 40 साल पुरानी कॉलोनी में बांस-बल्लियों के सहारे लटकते और झूलते तार दिखते हैं। बिछाए गये तार घरों के छज्जों और रेलिंग को छू रहे हैं, जिससे हर वक्त करंट लगने का डर बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे इस 'मौत के जाल' से मुक्ति के लिए जूनियर इंजीनियर से लेकर अधिशासी अभियंता तक के चक्कर काट चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। आम लोगों की इसी पीड़ा को आवाज देने के लिए हिन्दुस्तान की टीम ने 'बोले लखनऊ' अभियान के तहत बदालीखेड़ा की पड़ताल की। पेश है रिपोर्ट- लखनऊ, हिन्दुस्तान टीम। एक ओर लेसा हर घर तक सुरक्षित बिजली पहुंचाने का दावा करता है, वहीं दूस...
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