रामगढ़, मई 17 -- गोला, निज प्रतिनिधि। झारखंड के अलग राज्य बने ढाई दशक बीत चुका है। वनाधिकार कानून को लागू हुए 19 वर्ष हो गए हैं। इसके बाद भी वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासियों के जीवन स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है। मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल को छोड़कर अब तक जितने भी यहां के मुख्यमंत्री बने सभी आदिवासी ही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जंगल और उसके आस-पास सदियों से रह रहे आदिवासियों के जीवन में बदलाव क्यों नहीं आ रहा है। गोला प्रखंड के 18778.79 एकड़ वनभूमि में कभी भरपूर जंगल था। लेकिन अब इतना नहीं बचा है। हिन्दुस्तान के बोले रामगढ़ की टीम से गोला के ग्रामीणों ने अपनी समस्या साझा की। गोला के जंगलों व इससे सटे इलाकों में हजारों की संख्या में आदिवासी बसते हैं, जो सीधे तौर पर प्रकृति पर निर्भर हैं। लेकिन जंगलों के विनाश से आदिवसियों का जीव...
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