रांची, मार्च 17 -- रांची, वरीय संवाददाता। हॉकी, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, वुशु, फुटबॉल जैसे खेलों में पदक तो हम जीत रहे हैं। बीते एक दशक में नॉन ओलंपिक खेलों में भी हमारी भागीदारी और पदक की संख्या राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है। पर, अफसोस है कि इन खेलों के साथ दोयम दर्जे की नीति रही है। न खेल नीति में इन्हें स्थान दिया गया और न ही इनके खिलाड़ियों को खिलाड़ी ही समझा जा रहा है। ऐसे में प्रतिभा कुंठित हो रही है। इन खेलों से जुड़े संघ भी निराशा में हैं। यह दर्द है नॉन ओलंपिक खेलों के खिलाड़ियों का। उनका कहना है कि हम राष्ट्रीय स्तर पर पदक तो जीत रहे हैं, लेकिन अपने राज्य में ही हमें न तो खिलाड़ी समझा जा रहा है और न सहयोग किया जा रहा है। राज्य में एक दर्जन से अधिक नन ओलंपिक संघ हैं। बुनियादी सुविधाओं के आभाव में खेलों के विकास में इन खेल संघों को परेशानियों क...
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