मैनपुरी, दिसम्बर 30 -- जिले का युवा आज सवाल जेहन में लिए खड़ा है। सवाल अपने भविष्य को लेकर, सवाल उस मेहनत को लेकर जो वह वर्षों से कर रहा है और सवाल उस सिस्टम को लेकर, जो अब तक उसकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। खेतों, कस्बों, कोचिंग सेंटरों और छोटे कमरों में रहने वाले ये युवा बड़े सपने तो देख रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने की राह कठिन होती जा रही है। हिन्दुस्तान के बोले मैनपुरी संवाद में युवाओं ने बताया कि पढ़ाई के बाद भी रोजगार नहीं मिलना सबसे बड़ा दर्द है। 90 के दशक में जहां एक सरकारी नौकरी ही सफलता की पहचान थी, वहीं आज का युवा सम्मानजनक काम, आत्मनिर्भरता और पहचान चाहता है। नई शिक्षा नीति से उम्मीद तो जगी है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर अभी अधूरा दिखता है। मैनपुरी के युवाओं की यह कहानी सपनों और संघर्ष के बीच झूलती एक सच्चाई है। जिले में य...