मेरठ, अप्रैल 20 -- मेरठ की सड़कों पर दौड़तीं जेएनएनयूआरएम की बसों के चालक परिचालक जिंदगी की दौड़ में पीछे ही नजर आते हैं। अपनी जिंदगी के कई साल यात्रियों और विभाग की सेवा में लगाने के बाद भी उन्हें मिला सिर्फ इंतज़ार, टूटी उम्मीदें। जो अपना और परिवार का पेट पालने में भी असमर्थ हैं। एक बार फिर वो जिंदगी में वही रफ्तार चाहते हैं। जेएनएनयूआरएम के तहत मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड में दस वर्षों तक नौकरी करने वाले लगभग 400 चालक और परिचालक आज बेरोजगारी के अंधेरे में भटक रहे हैं। कभी इनकी पहचान मेरठ की रफ्तार थी, आज ये सिस्टम की लापरवाही का शिकार बनकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अपने हक के लिए ये लोग न जाने कितनी बार अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन समाधान कुछ नहीं निकला। आज खुद और अपने परिवार का जीवन चलाने के लिए जद्दोजहद कर रहे...
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