मेरठ, सितम्बर 15 -- शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर दिए गए फैसले से शिक्षकों में भारी रोष है। शिक्षकों के लिए तय की गई टीईटी के नियम की बाध्यता गले की फांस बन गई है। इस नियम की जद में शहर के करीब तीन हजार शिक्षक आ रहे हैं। इस नियम के विरोध में पूरा शिक्षक महकमा संवैधानिक दायरे में रहकर कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबसे ज्यादा प्रभाव प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ेगा, जिन्होंने टीईटी पास नहीं किया। इनको दो साल के भीतर टीईटी पास करना होगा नहीं तो नौकरी चली जाएगी। वहीं, जिनकी नौकरी में पांच साल बचे हैं उनको बिना टीईटी प्रोन्नति नहीं मिलेगी। बड़ी समस्या यह है कि पूर्व में मृतक आश्रित शिक्षक, इंटरमीडिएट के साथ बीटीसी कर बने शिक्षक और जो प्रशिक्षित नहीं हैं उनके लिए संक...
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