मुरादाबाद, फरवरी 17 -- करीब पंद्रह हजार करोड़ का सालाना निर्यात करने वाली पीतल नगरी मुरादाबाद की रीढ़ यहां के ढाई लाख से ज्यादा आर्टीजन हैं। महंगाई और विभागीय योजनाओं का सही लाभ उन तक नहीं पहुंचता है। पीतल की सिल्ली के दाम दस साल में 250 से 600 रुपये हो गए। ऐसे मे दस्तकार परेशान हैं। अब नई पीढ़ी इससे दूर हो गई है। जो पहले से काम करते आ रहे उनमें से तमाम ई रिक्शा चलाने लगे तो कुछ आर्टीजन नेपाल, श्रीलंका, सऊदी अरब का रुख कर गए। दस्तकारों को सुविधाओं के साथ सेहत और सुरक्षा भी चाहिए। निर्यात में बड़ी भागीदारी रखने वाले दस्तकारों का अब इस कारीगरी से मोह भंग होने लगा है। उन्होंने कहा कि चाइना सस्ते उत्पाद बेचता है इससे मुरादाबाद के पीतल बाजार पर असर पड़ता है। हस्तशिल्प के कार्यों में दस्तकारों को घरेलू बिजली के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। चालीस लाख ...
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