मथुरा, अप्रैल 19 -- शिक्षिकाओं से शिक्षण कार्य के अलावा अन्य दूसरे कार्य भी कराए जाते हैं। इनमें सीएलओ, परिवार सर्वेक्षण का काम आदि भी कराए जाते हैं। इस काम के बदले उन्हें कोई अतिरिक्त भत्ता या पारिश्रमिक भी नहीं मिलता। उन्हें स्टेशनरी आदि के लिए खर्च का पैसा तो विभाग से मिलता है, लेकिन विद्यालय से तहसील तक आने- जाने का कोई भत्ता उन्हें नहीं मिलता है। विद्यालय से तहसील तक आने जाने के खर्च शिक्षिकाओं को अपनी जेब से करने होते हैं। शिक्षिकाओं की इस पीड़ा को समझने और उसके निस्तारण के लिए अभी तक अधिकारियों द्वारा कुछ नहीं किया गया है। काम में थोड़ी सी कमी पर अधिकारियों के कोप का भाजन उन्हें बनना पड़ता है। चिकित्सीय अवकाश के लिए भी शिक्षिकाओं को संघर्ष करना पड़ता है। पोर्टल पर छुट्टी डालने के बाद भी उसे कैंसिल कर दिया जाता है। पोर्टल पर चिकित्सीय अ...
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