बुलंदशहर, फरवरी 13 -- कंधों पर कांवड़, होठों पर "बोल बम" का जयघोष और मन में केवल महादेव के दर्शन की अभिलाषा. शिवभक्तों के लिए कांवड़ यात्रा केवल एक सफर नहीं, आस्था, तपस्या और समर्पण की साधना है। लेकिन जब यही साधना टूटी सड़कों, गड्ढों, कीचड़ और अव्यवस्था के बीच से गुजरने को मजबूर हो जाए, तो सवाल उठता है कि क्या हमारी व्यवस्थाएं भगवान शिव के भक्तों की आस्था का सम्मान कर पा रही हैं। महाशिवरात्रि से पहले देहात क्षेत्र के मुख्य मार्गों की हालत देखकर यही प्रतीत होता है कि श्रद्धा की इस पावन यात्रा को खुद भगवान शिव के भरोसे छोड़ दिया गया है। कई बार स्थानीय लोगों ने जिला-प्रशासन व संबंधित विभाग के अधिकारियों से लिखित में शिकायतें भी की, लेकिन आज तक उनकी शिकायतों का समाधान नही हो पाया है। शिव भक्तों के लिए भोले की राह आसान नहीं होगी। महाशिवरात्रि ...