बिजनौर, अक्टूबर 16 -- दीपावली के समय मिट्टी के दीयों और बर्तनों की मांग बढ़ती है, लेकिन कुम्हार समाज को बढ़ती लागत और सस्ते चीनी उत्पादों से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करने वाले कुम्हार के सामने आज परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। आज लोगों ने मिट्टी के बर्तनों को छोड़ कर सस्ते प्लास्टिक और धातु के बर्तनों का उपयोग करना शुरू कर दिया। मशीनरी से बने उत्पादों की प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की कमी और समर्थन के अभाव के कारण यह परंपरागत व्यवसाय संकट में है। यदि इनकी समस्याओं का समाधान हो जाए तो मिट्टी के उत्पाद बनाने की कला एक बड़े रोजगार के साधन में बदली जा सकती है। कुम्हार बिरादरी में आज भी काफी संख्या में कुम्हार का काम करते हैं। इनका काम मिट्टी के साथ मेहनत कर उससे विभिन्न आकार देना होता ह...
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