बिजनौर, मई 28 -- पूर्वी बंगाल से विस्थापित होने के बाद अपनी ही जमीन पर बेगाने होने का दर्द बिजनौर में पुनर्वासित बंगाली समाज झेल रहा है। उस समय प्रत्येक परिवार को छह एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। 1978 में मध्य गंगा बैराज के लिए अधिकतर किसानों की भूमि सरकार ने अधिग्रहित कर ली थी। इससे बंगाली कृषक भूमिहीन व बेरोजगार हो गए। जो भूमि उन्हें प्रदान की गई हैं, उस भूमि की श्रेणी गवर्मेन्ट एक्ट की श्रेणी में होने से कृषि अथवा एजुकेशन लोन, हाउसिंग लोन आदि से वंचित हैं। आधे साल बांध के पानी से खेती की जमीन जलमग्न रहने से उपज सड़-गल जाती है। आजादी से पहले पूर्वी बंगाल से विस्थापन का दंश झेलकर बिजनौर की माटी पर उम्मीद की किरणें तलाशने वाले बंगाली समाज का जीवन आज घोर निराशा और अनिश्चितता के अंधकार में डूबा है। बंगाली समाज के ये छह गांव अमीरपुरदास उर्फ धर्मन...
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