बाराबंकी, फरवरी 10 -- स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा बहुएं आज खुद उपेक्षा का शिकार हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, प्रसव पूर्व-पश्चात सेवाएं और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देने वाली आशा बहुओं के सामने समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। सबसे बड़ी समस्या समय से मानदेय न मिलना है। कई-कई महीनों तक भुगतान अटका रहता है, जिससे उनको घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। प्रसव कराने पर मिलने वाला अतिरिक्त भुगतान भी अक्सर समय पर नहीं दिया जाता या फिर कागजी प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाता है। आशा बहुओं का कहना है कि दिन-रात मेहनत करने के बावजूद उन्हें मेहनताना पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पेश है बोले हिन्दुस्तान टीम की एक रिपोर्ट... बारांबकी। घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचान...