बाराबंकी, अप्रैल 10 -- बाराबंकी। सुबह हो फिर दोपहर बाराबंकी शहर के विभिन्न स्कूलों में पचीस हजार से अधिक पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में आधे विभिन्न साधनों से ही स्कूल तक का सफर तय करते हैं। इसमें वैन, बोलेरो, कार के अलावा ई रिक्शा हैं। अधिक से अधिक बच्चों को बैठाकर अधिक कमाई के प्रयास में नौनिहालों की फिक्र तक न वाहन के ड्राइवर करते हैं और न ही उनके मालिक। नतीजा अधिकांश वाहन खतरनाक सफर रोजाना कर रहे हैं। निजी वाहनों का कर दिया व्यवसायीकरण : बाराबंकी शहर में स्कूल के वाहनों की संख्या सुबह व दोपहर में कम नजर आती है। उससे अधिक निजी वाहनों पर स्कूली छात्र-छात्राएं अधिक सफर तय करते हैं। हालात यह है कि निजी वैन, कार, बोलेरो आदि वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करते हुए इनसे बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक छोड़ा जा रहा है। इससे एआरटीओ विभाग के...
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