बहराइच, जून 15 -- बहराइच। हर साल बाढ़ की विभीषिका तराई को गहरा जख्म देती है। 200 से अधिक गांवों के चार लाख की आबादी पलायन को विवश होती है। बेजुबानों को भी दो-चार होना पड़ता है। हर साल विभीषिका से बचाने के लिए करोड़ों के वारे-न्यारे होते हैं, लेकिन न तो बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित लोगों को निजात मिल पा रहा है और न ही उजड़े आशियाने व उपजाऊ भूमि से बेदखल प्रभावितों को स्थाई ठौर भी मयस्सर हो पा रहा है। लिहाजा दर्द झेलते चार लाख की आबादी इस बार भी प्रशासन के मरहम से जख्म का दर्द मिटाने के लिए उम्मीद बांधे है। हालांकि प्रशासन बाढ़ से बचाव के मसौदे को अंतिम रूप दे रहा है जिसमें प्रभावितों के भोजन, इलाज व अस्थाई निवास तक के मुकम्मल व्यवस्था का दावा कर रहा है। -------- बहराइच, संवाददाता। बारिश का मौसम आने को है। ज्यादा बारिश होने की स्थिति में जी...
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