बहराइच, फरवरी 23 -- तराई के माथे पर बालश्रम भी एक कलंक है। पढ़ने-लिखने व खेलने की उम्र में नौनिहाल गृहस्थी चलाने के लिए होटलों पर जूठन साफ करने को मजबूर हो रहे हैं। शहर से लेकर कस्बों तक जिधर नजर दौड़ाइए उधर 10 से 12 साल के उम्र के बच्चे काम करते नजर आ रहे हैं। हालांकि बालश्रम रोकने को लेकर श्रम विभाग समेत कई निजी संस्थाएं भी काम कर रही हैं, लेकिन बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ही बच्चों से श्रम कराने में हिचकिचाते नहीं हैं। जब तक सामाजिक जागरूकता नहीं होगी तराई का भविष्य यूं ही सुधर नहीं पाएगा। बहराइच, संवाददाता। तराई के लिए बालश्रम एक अभिशाप बन गया है। सरकारी आंकड़े भले ही बालश्रम के बढ़ते ग्राफ में अंकुश का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत इससे उलट है। शिक्षा के प्रति अभिभावकों का रवैया, परिवार की आर्थिं स्थिति न केवल परिवार के बड़ों बल्कि अबोध...
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