बहराइच, अक्टूबर 9 -- मरीजों और अस्पतालों की संख्या पहले की तुलना में अब काफी बढ़ गई है। फार्मा कंपनियां भी बड़ी तादाद में बढ़ी हैं। ऐसे में हर दवा कंपनी की दवाइयां रख पाना छोटे दुकानदारों के लिए संभव नहीं होता। दवा कारोबार के लिए विभागीय नियम कायदों का पालन करने में बड़ी अड़चने आ रही हैं। छोटे दवा कारोबारियों का कहना है कि 40 लाख से नीचे कारोबारियों को अच्छा लाभ नहीं मिल रहा है। असली या नकली दवा की पहचान के लिए दवा कारोबारियों के पास भी कोई विकल्प नहीं हैं। वे पूरी तरह से फार्मा कंपनियों पर ही निर्भर हैं। जो दवाई प्रतिबंधित कर दी जाती हैं या एक्सपायर हो जाती हैं, उसके नुकसान की भरपाई भी उन्हें नहीं हो हिन्दुस्तान ने बोले बहराइच मुहिम के तहत छोटे दवा कारोबारियों से बातचीत की तो उन्होंने अपनी समस्याएं साझा की नम्बर गेम 1500 के आसपास जिले भर...
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