बहराइच, अगस्त 6 -- जिले की चार तहसीलों के 100 से अधिक गांवों के सैकड़ों मजरे घाघरा के किनारे हैं। हर साल घाघरा की लहरें इन गांवों के 50 फीसद परिवारों को कभी न भूलने व मिटने वाला दर्द दे रही है। हर साल सैकड़ों लोग बेघर व भूमिहीन हो जाते हैं लेकिन बाढ़ पूर्व तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती हैं। इस बार भी यही हुआ। जिले के ज्यादा प्रभावित गांवों में बाढ़ व कटान रोधी कार्य शुरू किया गया। अब जब नदी में बाढ़ जैसे हालात हुए तो जिम्मेदारों ने किनारा कर लिया। समय रहते राहत कार्य पूरा न हो पाने के कारण ग्रामीण बाढ़ व कटान से फिर जूझेंगे। किसानों की लहलहाती फसलों लगे खेत व मकान धारा में समाहित होंगे। सैकड़ों ऐसे ग्रामीण हैं, जिनके पास रहने को मकान बचा और न ही फसल उगाने के लिए एक किता जमीन। भाग्य को कोसते ग्रामीण प्रशासन की उम्मीदों के दीए से ...
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