बलिया, मार्च 10 -- दो मंजिला विकास भवन में जिले के विकास का खाका खींचा जाता है। करीब 15 विभिन्न विभागों के कार्यालयों में दो सौ से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। जिनके टेबलों से तरक्की की फाइलें गुजरती हैं, वे खुद सुविधाओं, संसाधनों के लिए तरस रहे हैं। खुले ढक्कन वाली टंकी का कचरायुक्त पानी पीने को विवश हैं। शौचालय की नियमित सफाई नहीं होती। बदबू से काम करना मुश्किल हो जाता है। महिला शौचालय ग्राउंड फ्लोर पर ही है। जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरे शोपीस बने हैं। ई-ऑफिस के लिए संसाधनों की कमी है। विकास भवन स्थित कक्ष में कर्मचारियों ने 'हिन्दुस्तान से बातचीत शुरू की तो फाइलों के पन्नों की तरह खुलते चले गए। विकास भवन कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार तिवारी ने बंदरों के उत्पात से चर्चा की शुरुआत की। बोले, विकास भवन की बाहरी दीवारों पर लगे ...
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