बलिया, फरवरी 23 -- ऑनलाइन शॉपिंग के चलन ने कारोबार का रंग वैसे ही उतार रखा है, विभागीय जटिलताओं ने मुश्किलों को और बढ़ाया है। जीएसटी विभाग की कार्यशैली ने व्यापारियों को अर्थशास्त्र का 'विद्यार्थी बना दिया है। व्यापार के बजाय टैक्स के पेंच समझने पर उनका पूरा फोकस हो जाता है। बाजार में जरूरी सुविधाओं की कमी अखरती है। आसपास की गलियां गंदी हैं। शौचालय-यूरीनल नहीं हैं। वाहन स्टैंड न होने से दुकानों के पास जाम लग जाता है। ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पाते। आग से बचाव का भी इंतजाम नहीं है। बाजार के एक प्रतिष्ठान पर 'हिन्दुस्तान से बातचीत में कपड़ा कारोबारियों का दर्द सामने आया। प्रीतम गुप्त ने कहा कि ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते दायरे ने व्यवसाय को बर्बाद तो किया ही है, विवाद की वजह भी बन गया है। आम तौर पर कोई ग्राहक कपड़ा देखने के बाद ही खरीदता है। ऑन...
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