बलिया, जून 6 -- खेल की समृद्धि के लिए जिले में एक ओर स्पोर्ट्स कॉलेज बन रहा है, दूसरी ओर यहां के खेल-खिलाड़ी जिम्मेदारों की उपेक्षा से आहत हैं। फुटबॉल में दिलचस्पी रखने वाले खिलाड़ी मैदान और खेल सामग्री की कमी से अपने सपनों को आकार नहीं दे पा रहे हैं। समर कैंप या प्रशिक्षण सत्र न होने से प्रतिभाएं निखरती नहीं हैं। सरकारी सहयोग न मिलने से चुनौतियां कठिन लगती हैं लेकिन खिलाड़ियों में पहाड़ को 'किक मारकर आगे बढ़ने का जुनून भी दिखाई देता है। वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम में 'हिन्दुस्तान से बातचीत में फुटबॉल खिलाड़ियों ने अपनी दिक्कतों को साझा किया। समाधान के रास्ते भी दिखाए। प्रिंस कुमार ने बताया कि फुटबॉल, ड्रेस और मैदान की कमी है। इससे न केवल प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि प्रतिभा भी निखर नहीं पा रही। खेलों के प्रति जिम्मेदा...
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