बलरामपुर, मई 16 -- पचपेड़वा, संवाददाता। इंडो नेपाल सीमा स्थित थारू बाहुल्य गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं उपलब्ध हैं। 21वीं सदी में जहां देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, वहीं थारू समाज के लोग संचार क्रांति से भी कटे हुए हैं। गांवों तक पहुंचने के लिए पहाड़ी नालों पर न तो पक्के पुल हैं और न ही आने-जाने के लिए पक्की सड़कें। प्रसव पीड़ा से छटपटाती महिलाओं अथवा गंभीर रोगों से जूझ रहे लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सरकारी एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना नामुमकिन है। गांव की बिजली व्यवस्था सोलर पैनल पर निर्भर है। वर्षा के दिनों में पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। नेपाल सीमा पर थारू बाहुल्य गांवों की बहुलता है। थारुओं को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला है। उनके उत्थान के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है। सीएम योगी को थारू परिवारों को बेहद लगाव है...
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