फिरोजाबाद, सितम्बर 11 -- आत्महत्या की बढ़ती प्रवत्ति को रोकने के लिए पहली पहल परिवार से ही होगी। मनोविज्ञान के शिक्षकों एवं छात्रों की मानें तो आज के वक्त में बच्चों को माता-पिता को समझना होगा। जनरेशन गैप बढ़ रहा है, नई पीढ़ी की अपनी इच्छाएं हैं तो उन्हें पूरा करने के प्रति उत्साह भी, लेकिन कई बार परिवार में संवादहीनता के अभाव में मां-बाप उन पर अपनी इच्छाएं थोप देते हैं, जिनके बोझ तले दब कर बच्चे डिप्रेशन में आ जाते हैं। परिवार में भावनात्मक दूरियां होने से अभिभावक भी इनकी मनोदशा को समझ नहीं पाते हैं। हिन्दुस्तान के बोले फिरोजाबाद के तहत एसआरके महाविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग के प्रवक्ताओं एवं छात्रों से जब आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर संवाद किया तो मनोविज्ञान से जुड़े हुए कई पहलू सामने आए। संवाद में छात्रों ने कहा कि संयुक्त परिवार में बच...
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