फर्रुखाबाद कन्नौज, मई 7 -- परिषदीय विद्यालयों में एक लाख 69 हजार बच्चों के खेल के लिए कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बच्चों की सुविधाओं पर गौर न किए जाने का ही नतीजा है कि उन्हें खेतों की पगडंडियों या फिर घरों के चबूतरों पर खेल खेलने को मजबूर होना पड़ रहा है। परिषदीय विद्यालयों में खेल के लिए जो किट उपलब्ध कराई गई हैं उनमें भी अधिकांश प्रयोग में ही नहीं लाई जा रही हैं। अध्यापक किटों को बक्सों में बंद करके उनकी शोभा बढ़ा रहे हैं। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तानसे बच्चों ने बेबाकी से अपनी बात रखी। सागर कहने लगे कि विद्यालयों में तो खेल की गतिविधियां हो ही नहीं रही हैं। साल में एक दो बार जरूर खेल हो जाया करते हैं। बाकी समय में कक्षाओं के बाद सीधे घर चले जाते हैं। जब खेल का मन करता है तो खेतों में या फिर घरों के चबूतरों और आस पास गलियों मेें ही क्र...
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