फर्रुखाबाद कन्नौज, मार्च 18 -- अपने शहर में ही दो दशक के भीतर 24 से अधिक स्टूडियो बंद हो गए हैं और फोटोग्राफरों ने दूसरे काम काज में अपने को व्यवस्थित कर दिया है। शादी-विवाह के सीजन में तो काम रहता है पर उसके बाद वे बेरोजगार हो जाते हैं। ऐसे में परिवार चलाना कठिन हो जाता है। फोटोग्राफरों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलता। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान से चर्चा में फर्रुखाबाद फोटो क्लब के प्रभारी अमित राठौर कहने लगे कि स्टूडियो और आउटडोर फोटोग्राफरों के सामने चुनौतियों की जो भरमार है उसके समाधान की आस नहीं दिख रही है। सरकार से ढेरों उम्मीदें हैं पर यह उम्मीदें कब तक पूरी होंगी, पता नहीं। हमें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए ताकि ऑफ सीजन में हम अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। वरिष्ठ फोटोग्राफर रविंद्र भदौरिया कहते हैं कि भरपूर मेहनत और ...
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