फर्रुखाबाद कन्नौज, अप्रैल 25 -- दालमोठ के रूप में सेम का स्वाद बेहद ही निराला होता है पर जो सेम किसान भरपूर मेहनत के बाद तैयार करते हैं उनकी जिदंगी में कोई बहार नहीं आ पा रही है। पग-पग पर दुष्कर स्थिति का सामना कर रहे हैं। दिन रात रखवाली के बाद सेम के बीज की जब मार्केटिंग की नौबत आती है तो वह औने-पौने में ही बिक जाता है। इस साल तो सेम किसानों को तकदीर ने ही धोखा दे दिया। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि यहां का जो छुटपुट मार्केट है उसमें उन्हें 50 से 70 रुपये किलो के ही रेट मिलेंगे। उन्हें इस बात का मलाल है कि जिस फसल को मेहनत के साथ तैयार करते हैं उसमें उसी बीज को दालमोठ के रूप में दुकानदार 1000 से 1200 रुपये किलो में बेचने का काम करते हैं। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान सें चर्चा के दौरान किसान रमेश शाक्य कहते हैं कि न तो कृषि विभाग और न ही औद्या...
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