गंगापार, जून 29 -- मांडा अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही के चलते, नहरों का जाल के होने के बावजूद नहरों में पानी न होने के कारण हर साल मांडा क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ खेती तबाह हो जाती है और क्षेत्रीय किसान आंखों में आंसू भरकर अपनी बर्बादी देखने के सिवा कुछ नहीं कर पाता। बाण सागर परियोजना से जोड़े जाने के बावजूद भी मांडा की नहरों में अक्सर धूल उड़ती रहती है। धान की नर्सरी हो या गेहूं का पलेवा किसानों को अपने स्तर से ही सिंचाई की व्यवस्था करनी पड़ती है। जनपद के दक्षिणी पहाड़ी भूभाग में बसे मांडा क्षेत्र के अधिकतर ग्राम पंचायत व गांव पहाड़ी क्षेत्र में ही हैं। मांडा ब्लॉक के दक्षिण तीस किमी के डेढ़ दर्जन गांवों के लिए उपरौध राजबहा का वर्ष 1986 में निर्माण हुआ था। इस उपरौध राजबहा से कुल छह माइनर और दो अर्धनिर्मित माइनरों से पूरे उपरौध क्षेत्र ...
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