गंगापार, मार्च 3 -- नदियों का महत्व गर्मी के दिनों में पता चलता है। कहने को कोरांव में सात नदियां हैं लेकिन सालभर पेयजल और सिंचाई का संकट बना रहता है। इसी बात से यह स्पष्ट हो जाता है कि नदियों पर शासन की कोई निगाह नहीं है। पिछले वर्ष लपरी नदी की सफाई का बीड़ा सीडीओ ने उठाया जरूर लेकिन हकीकत यह है कि धन साफ हो गया लेकिन नदी जस की तस ही है। नदियों के पानी को संचय करने, नदियों को संरक्षित करने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तक नहीं है। इसके साथ ही लोगों में भी नदियों के प्रति कोई जागरूकता नहीं है जिससे जल संसाधन मौजूद होने के बाद भी उसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि आज ये नदियां न होतीं तो शायद हम भी न होते। पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं हैं कि मानव जीवन में नदियां न केवल हमें अन्न देतीं बल्कि संस्कार भी सिखाती हैं। ऋषि, मुनि तो नदियों के किनारे...
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