गंगापार, मई 2 -- सैदाबाद गंगा कछार गंगा पर तटबंध न होने से कछारी क्षेत्र के किसानों की हालत खराब है। किसानों की वर्षों पुरानी मांग पर अब तक किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। जबकि तटबंध बनने से गंगा किनारे बसे गांवों को हर मौसम में आने वाली समस्या से राहत मिलेगी। शहर से सटे उस्तापुर, निमी से लीलापुर तक गंगा की दो धाराएं है। दोनों धाराएं लगभग पंद्रह किमी तक समानांतर चलकर लीलापुर में मिलती है। गंगा की दो धाराओं के बीच औसतन चार से पांच किमी की पट्टी है। शहर में बढ़ते भीड़ के दबाव को कम करने के लिए लाखों हेक्टेयर में फैली खाली जमीन का उपयोग करके इंसानी बस्तियां बसाई जा सकती हैं। ऐसा तभी संभव है जब दोनों धाराओं को एक कर दिया जाय। गंगा में तटबंध बनने से किसानों को बाढ़ से भी मुक्ति मिलेगी व किसान साल भर रबी, खरीफ व जायद की फसलों की खेती कर सकेगा। फैले...
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