भागलपुर, फरवरी 5 -- -प्रस्तुति : अमित गोस्वामी रजनीश दलहन की खेती के लिए बहुचर्चित रहा पूर्णिया समेत पूरा सीमांचल का इलाका अब दलहन उत्पादन में काफी कमजोर हो चुका है, जबकि इस इलाके में दाल-रोटी और दाल-भात की काफी ज्यादा प्रथा थी, जो अब रोटी सब्जी और चावल सब्जी पर आ गया है। किसानों को दलहन की खेती में वाजिब मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान दलहन की खेती करने से पीछे हट रहे हैं। दलहन की खेती से कहीं ज्यादा मक्का और केला तथा सूर्यमुखी की फसल में किसानों को आर्थिक मुनाफा होने लगा है, जिसके कारण मूंग दलहन की खेती हासिये पर चली गई है। परिणाम स्वरूप दाल खाने की चाहत रखने वाले लोगों को मार्केट से ऊंची कीमत पर दाल खरीद कर खानी पड़ रही है। मार्केट के दाल में अब वह स्वाद भी नहीं है और सुगंध भी नहीं है। एक जमाना था जब लोग दलहन का मिक्स सत्तू बनाते थे। आज...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.