भागलपुर, फरवरी 25 -- - प्रस्तुति-अमित कुमार गोस्वामी रजनीश सीमांचल कृषि प्रधान इलाका है। आज भी बड़ी आबादी की आजीविका खेती पर निर्भर है। बदलते समय, घटती जोत, बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितताओं के बीच किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कम लागत में अधिक मुनाफा। ऐसे समय में एक ऐसी फसल किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जो कम पानी में, कम लागत में और कम समय में अधिक उत्पादन देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सहजन को योजनाबद्ध ढंग से बढ़ावा दिया जाए, तो छोटे और सीमांत किसान भी सालाना लाखों रुपये की आय अर्जित कर सकते हैं। सहजन का वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। यह एक बहु उपयोगी पौधा है, जिसकी पत्तियां, फलियां, फूल और यहां तक कि बीज भी उपयोगी हैं। सहजन को सुपर फूड की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, व...
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