भागलपुर, दिसम्बर 21 -- - प्रस्तुति : भूषण/ रजनीश पूर्णिया समेत पूरा सीमांचल जो कभी दलहन उत्पादन का गढ़ माना जाता था, अब दलहन खेती में कमजोर पड़ गया है। किसानों को वाजिब मूल्य नहीं मिलने के कारण वे मक्का, केला और सूर्यमुखी जैसी अधिक लाभदायक फसलों की ओर मुड़ गए हैं। परिणामस्वरूप दलहन की खेती हाशिए पर चली गई है और बाजार में दाल अब महंगी व फीकी हो गई है। कभी सीमांचल में दलहन से बना मिक्स सत्तू आम था, लेकिन आज नई पीढ़ी के लिए वह बीते समय की बात बन गया है। गंगा-कोसी के मैदानों में कभी चना और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अरहर की खेती का दबदबा था, जो अब लुप्तप्राय है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूर्णिया में इस वर्ष मात्र 2845.8 हेक्टेयर भूमि में दलहन की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जबकि मक्का सवा लाख हेक्टेयर और धान करीब 90 हजार हेक्टेयर में उगाया जा रह...
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