भागलपुर, जनवरी 30 -- -प्रस्तुति: अमित गोस्वामी रजनीश कभी हर मौसम में हरियाली और मेहनत की आवाज से गुलजार रहने वाले पूर्णिया के खेत खलिहान आज वीरान हैं। बीज मिट्टी में जाने को तैयार हैं,पानी और खाद की भी व्यवस्था है। लेकिन खेती का सबसे जरुरी ताकत मजदूर लगातार कम होते जा रहे हैं। खेतों की मेड़ पर खड़ा होकर किसान आज सबसे पहले आसमान नहीं बल्कि सड़कों-गलियों की ओर देखते हैं कि कोई मजदूर पर नजर मिल जाए। मजदूर मिलने पर तुरंत एडवांस मजदूरी देकर खेती का काम कराया जा सके। फसल समय पर बोआई करने या कटाई करने के लिए मजदूर की तलाश लगी रहती है। खेती के अलग-अलग चरणों में मजदूरों की भूमिका काफी निर्णायक होती है। गेहूं की खेती में हार्वेस्टर और अन्य मशीनों से से कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन धान की खेती आज भी पूरी तरह मानव श्रम पर निर्भर है। धान का बिचड़ा का ...