पूर्णिया, नवम्बर 5 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। लोकतंत्र की ताकत जनता के हाथ में होती है, लेकिन जब मतदान का प्रतिशत औसतन 60 फीसदी के आसपास सिमट जाता है, तो सवाल उठता है कि क्या बाकी 40 फीसदी मतदाता अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं? चुनाव के मौसम में प्रशासन और राजनीतिक दलों की तमाम कोशिशों के बावजूद मतदाताओं की उदासीनता चिंता का विषय बनी हुई है। अब सवाल यह है कि मतदान प्रतिशत कैसे बढ़े और इसके लिए कौन-से ठोस कदम उठाए जाएं। पूर्णिया के लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखी। अधिकांश का मानना है कि मतदान को "अभियान" की तरह नहीं बल्कि "जन-चेतना" का हिस्सा बनाना होगा। कई लोगों ने कहा कि डोर टू डोर यह बताना होगा कि मतदान हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है और उसका प्रयोग करना जरूरी है। उन्हें यह बताना होगा कि उनके एक मत से सरकार बन...
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