भागलपुर, दिसम्बर 28 -- - प्रस्तुति : अमित गोस्वामी रजनीश पूर्णिया और सीमांचल की उपजाऊ धरती पर आलू खेती का लंबा इतिहास रहा है। आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है और यह हर रसोई की जरूरत बन चुका है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में लोग किचन गार्डन में घरेलू जरूरत के लिए इसकी खेती करते थे, किंतु अब यह किसानों के लिए प्रमुख नकदी फसल बन गई है। समय के साथ इसकी वैरायटी बढ़ी है। आज आलू से पापड़, चिप्स और प्रोसेस्ड उत्पाद बन रहे हैं। इस उद्योग से जुड़ाव ने खेती को व्यावसायिक रूप दिया है। सीमांचल के खेतों में हर मौसम में बड़े पैमाने पर आलू बोये जाते हैं, जिनकी फसल अब सीधे कोल्ड स्टोरेज तक पहुंचती है। लेकिन किसानों की चिंता यह है कि लागत बढ़ने और दाम घटने से मुनाफा लगातार कम हो रहा है। सरकारी खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिलने से किसान बाजार क...