भागलपुर, जनवरी 2 -- -प्रस्तुति: अवधेश राय कृतिक आपदाओं से जूझते किसानों पर अब नीलगाय खेतों में लगी फसल को बर्बाद कर रहा है, जिससे पूर्णिया जिले के पश्चिमी इलाके की खेती संकट के दौर से गुजरने लगी है। कृषि प्रधान जिला पूर्णिया वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं और बदलते पर्यावरणीय हालात की मार झेलता आ रहा है। कभी बाढ़ तो कभी असमय बारिश, कभी सूखा तो कभी महामारी। यहां का किसान हर मौसम में किसी न किसी संकट से दो-चार होता रहा है। हिमालय की तराई से सटे इस मैदानी इलाके में खेती हमेशा जोखिम भरा व्यवसाय रही है, लेकिन बावजूद इसके किसान अपनी मेहनत, जिद और अनुभव के सहारे खेती को जिंदा रखे हुए हैं। हाल के दिनों में नीलगाय का बढ़ता आतंक अब किसानों के सामने एक नई और गंभीर आपदा के रूप में आ खड़ी हुई है। जब किसान अपने खेतों में पसीना बहाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रह...
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