पूर्णिया, सितम्बर 25 -- संगमरमर की भव्य प्रतिमा के कारण श्रद्धालुओं का आकर्षण केंद्र बना हुआ है। मंदिर प्रांगण में प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों पहर पूजा और आरती की जाती है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण रहता है। इसके अलावा, मंदिर में पदस्थ पुरोहित विधि-विधान के अनुसार श्रद्धालुओं को पूजा कराते हैं। यह मंदिर स्थानीय क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां भक्त जन आए दिन अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद लेकर आते हैं। पूजा की यह परंपरा यहां की धार्मिक सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर दिन यहां भक्तिमय माहौल बनाए रखती है। मदारघाट मुनि जी अखाड़ा में स्थित दुर्गा मंदिर का इतिहास समर्पण और आस्था की अनूठी मिसाल है। वर्ष 1981 में आयोजित एक सार्वजनिक बैठक में पूजा-अर्चना के लिए कच्चे मंदिर का...
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