भागलपुर, जुलाई 30 -- -प्रस्तुति : प्रदीप राय पूर्णिया, जिसे कभी 'पूर्ण अरण्य' और 'मिनी दार्जिलिंग' कहा जाता था, अब हरियाली की कमी से जूझ रहा है। पहले यहां की हरियाली और जलवायु दार्जिलिंग जैसी मानी जाती थी। महात्मा गांधी ने भी अपनी आत्मकथा में इसके मौसम की सराहना की थी। लेकिन पेड़ों की कटाई ने पर्यावरण संतुलन बिगाड़ दिया है। तापमान बढ़ा है, बारिश घट गई है। सरकार मात्र 10 रुपये में पौधे उपलब्ध करा रही है, लेकिन जनभागीदारी कमजोर है। अब जरूरत है कि समाज, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर इसे फिर से 'पूर्ण अरण्य' बनाएं। पूर्ण अरण्य ने पूर्णिया का नामकरण किया, आज वही पहचान उससे छिनती जा रही है। जंगलों के लिए प्रसिद्ध इलाके में आज वनों का क्षेत्र दिन प्रतिदिन सिमटता जा रहा है। शहरीकरण के बाद विकास कार्यों के नाम पर वृक्षों की कटाई जारी है। परिणामस्वर...
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