पलामू, मार्च 29 -- सदियों से व्यक्ति की हैसियत की परख उसके कपड़ों से ही नहीं बल्कि जूतों से भी तय होती है। मेदिनीनगर में जूता-चप्पल के विभिन्न ब्रांड के शोरूम खुले हैं परंतु फुटवियर कारीगर की उपयोगिता इससे खत्म नहीं हुई है। वर्तमान में फुटवियर कारीगर के समक्ष पहचान का संकट उत्पन्न हो गया है। बाजार में इनके लिए स्थान निर्धारित नहीं होने से फुटवियर कारीगर के समक्ष दुकान लगाने को लेकर चिंता बनी रहती है। हिन्दुस्तान के बोले पलामू कार्यक्रम के तहत समाज के लोगों ने अपनी पीड़ा साझा की। मेदिनीनगर। राजा हो या रंक, अधिकारी हों या चपरासी, स्त्री हों या पुरुष जूतों की आवश्यकता सभी को होती है। बात करें तो तमाम ब्रांडेड से लेकर लोकल स्तर तक की कंपनियों से निर्मित जूते-चप्पल परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप से फुटवियर कारीगर से अवश्य जुड़े होते हैं। इसके बाद भी बड़े...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.