पटना, फरवरी 16 -- पुस्तकालय में पाठकों को जरूरत के मुताबिक पुस्तकों और शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने में लाइब्रेरियन या पुस्तकालयाध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बिहार में 2008 में पुस्तकालय नियमावली तो लागू हुई पर बीते 16 वर्षों से लाइब्रेरियन की बहाली नहीं हुई है। हालांकि कॉलेजों में पुस्तकालय विज्ञान की पढ़ाई नियमित रूप से करायी जा रही है। राज्य में डिग्री या डिप्लोमा की योग्यता वाले बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सरकारी नौकरी की राह देख रहे हैं। उनका कहना है कि पुस्तकालयों के सुचारू संचालन के लिए लाइब्रेरियन की नियुक्ति की जानी चाहिए। इससे हजारों बेरोजगार अभ्यर्थियों को रोजगार भी मिलेगा। पुस्तकालय न केवल ज्ञान का विस्तार करने में मददगार होता है, बल्कि पढ़ने की आदत भी विकसित करता है। यह उन विद्यार्थियों के लिए अहम स्थान होता है, जो किसी विष...
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