जौनपुर, फरवरी 23 -- कोविड महामारी के समय होम्योपैथिक चिकित्सा ने लोगों में एक नई उम्मीद जगाई थी। कई दवाएं कारगर साबित हुईं, मांग इतनी बढ़ी कि बाजार में कम पड़ गईं। आज वही होम्योपैथिक चिकित्सा बुनियादी सुविधाओं की कमी, भारी टैक्स और प्रशासनिक लापरवाही की वजह से संकट में है। राजकीय होम्योपैथक अस्पताल उधार के भवन में कराह रहे हैं तो निजी अस्पतालों के संचालकों के भी कई दर्द हैं। होम्योपैथी डॉक्टर चाहते हैं कि उनकी क्लीनिकों पर टैक्स कम हो, चिकित्सा मद में बजट बढ़ा दे तो उनकी मुश्किलें काफी कम हो जाएंगी। जौनपुर में कभी तीन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन सरकार ने उन्हें प्रयागराज में मर्ज कर दिया। नए कॉलेज खोलने के बजाय मौजूदा सुविधाएं भी खत्म कर दी गईं। रुहट्टा स्थित एक क्लीनिक पर जुटे शहर के होम्योपैथिक चिकित्सकों ने 'हिन्दुस्तान से परिचर...
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