भागलपुर, अप्रैल 14 -- दोना पत्तल बनाने की कला सदियों पुरानी है लेकिन अब यह आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरत के साथ तालमेल बिठा रही है। दोना पत्तल बनाने का काम जो कभी पारंपरिक था, अब एक उभरता हुआ व्यवसाय बन गया है। स्थानीय लोग पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण प्लास्टिक के विकल्प के रूप में दोना पत्तल की मांग पूरी कर रहे हैं। इससे उनकी आजीविका को भी बढ़ावा मिल रहा है। दोना पत्तल बनाने का काम स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। इस काम से जुड़े हुए लोगों की भी अपनी समस्या है। उन्होंने बताया कि उन्हें बैंक से लोन नहीं मिलता है। ना ही सरकार द्वारा प्रशिक्षण की ही व्यवस्था कराई जाती है। 10 हजार से अधिक लोग लगे हैं इस व्यवसाय से 02 सौ से 300 रुपये तक प्रतिदिन होती है कमाई 05 से 08 घंटे तक करते हैं पत्तल बनाने का काम जिले के प...
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